भारत सरकार द्वारा लायी गयी “सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना, 2019” (SVLDRS, 2019) में केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क, लखनऊ आयुक्तालय, के कुछ उच्च अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार कर आवेदनकर्ता फर्म को अनुचित लाभ पहुँचाकर सरकारी खजाने को लाखों रूपये की ‘राजस्व हानि’ करवाने के सम्बंध में

सेवा में,

माननीय नरेन्द्र मोदी जी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार

प्रधान मंत्री कार्यालय

साउथ ब्लॉक, रॉय सीना हिल्स

नई दिल्ली – 110 011

विषय: भारत सरकार द्वारा लायी गयी “सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना, 2019” (SVLDRS, 2019) में केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क, लखनऊ आयुक्तालय, के कुछ उच्च अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार कर आवेदनकर्ता फर्म को अनुचित लाभ पहुँचाकर सरकारी खजाने को लाखों रूपये की ‘राजस्व हानि’ करवाने के सम्बंध में।

महोदय,

इस पत्र के माध्यम से हमारी संस्था आपको ये अवगत कराना चाहती है कि भारत सरकार ने करदाताओं के लिए वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में आने से पूर्व में चल रहे करविवादों के निस्तारण हेतु एक आकर्षक सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना, 2019, चालू की थी जिसमें करदाताओं को GST आने के पूर्व के सभी प्रकार के कर विवादों में बहुत कम देय राशि को जमा करके उनसे निजात पाने का प्रावधान था। इस तरह की योजनायें जब भी आती हैं तो सरकारी अफ़सरों की चाँदी हो जाती हैI आवेदनकर्ताओं को योजनाओं का अनुचित लाभ देने के लिए नियम और क़ानून की गलत रूप से व्याख्या की जाती है और उसके बदले में अवैध धन उगाही की जाती है जिससे सरकारी खजाने को चूना लगता है।

  1. संयोग से एक मामला संज्ञान में आया है कि लखनऊ के एक आवेदनकर्ता के SVLDRS आवेदन को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर, लखनऊ के अधिकारियों ने अनुचित तरीक़े से ग़लत वर्ग (category) में दिखा कर, आवेदनकर्ता को लाखों रूपये का अनुचित लाभ पहुँचा कर सरकार को चूना लगाया हैI अवगत कराना है कि भारत सरकार की उपरोक्त योजना के अनुसार अलग अलग वर्गों मे आवेदन करने में अलग-अलग प्रतिशत की छूट का लाभ मिल रहा था और आवेदन का वर्ग ग़लत दिखा के अनुचित लाभ दिया जा सकता था। इस योजना के अंतर्गत आए हुए आवेदन को परखने, आवेदन के वर्ग का निर्धारण करने और देय राशि का निर्धारण करने की ज़िम्मेदारी क़ानून द्वारा उच्च अधिकारियों की नामित समिति को दी गयी थी, जिसे समयबद्ध तरीक़े से योजना के तहत आए आवेदनों का निस्तारण करना था और यहीं पर व्यावसायिक फर्मों को अनुचित लाभ पहुँचा कर निजी लाभ लेने की संभावना प्रबल दिखती है।
  2. 3. ये मामला M/S APNATECH CONSULTANCY SERVICES P. LTD, REGENCY PLAZA, 3rd FLOOR, REGENCY PLAZA PARK ROAD, HAZARATGANJ, LUCKNOW, के SVLDRS-1 के तहत घोषणा संख्या LD0511190000365, दिनांक 11.2019 (संलग्नक–1 के रूप में संलग्न है) का है जिसमें नामित समिति के सदस्य महेंद्र रंगा, प्रधान आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क, लखनऊ आयुक्तालय एवं विवेक कुमार जैन, अपर आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क, लखनऊ आयुक्तालय द्वारा उपरोक्त आवेदनकर्ता को अनुचित लाभ पहुँचा कर भारत सरकार को लाखों रूपये का चूना लगाया गया है।
  3. 4. योजना के नियमानुसार आवेदनकर्ता की योजना के तहत “घोषणा के वर्ग” को निश्चित करने की अंतिम तिथि 06.2019 रखी गयी थी। इस तिथि में आवेदनकर्ता का मामला जिस भी स्तर पर लम्बित होता है उसी स्तर पर उसका वर्ग निर्धारित हो जाता हैं। उपरोक्त आवेदनकर्ता के SVLDRS-1 घोषणापत्र के अनुसार आवेदनकर्ता ने “Litigation Category” में अपना आवेदन किया था और मामले को CESTAT में लम्बित दिखाया था। SVLDRS-1 के घोषणापत्र से स्पष्ट हैं कि आवेदनकर्ता ने CESTAT में अपील दिनांक 04.07.2019 को फ़ाइल की थी, अतः आवेदनकर्ता स्पष्ट रूप से सबका विश्वास योजना द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि 30.06.2019 को किसी भी तरह के Litigation में नहीं था। योजना के अंदर घोषणापत्र से प्रतीत होता हैं कि आवेदनकर्ता का आवेदन “Arrears Category” में होना चाहिए था ना कि “Litigation Category” मेंI अतः नियमानुसार आवेदनकर्ता का आवेदन या तो निरस्त किया जाना चाहिए था या फिर आवेदन के देय कर का निर्धारण “Arrears Category” में किया जाना चाहिए था। इस तरह Category (वर्ग) में बदलाव को नियमविरुद्ध तरीके से स्वीकृत करने से आवेदनकर्ता को लाखों रूपये का अनुचित लाभ पहुँचा है क्योंकि दोनो Category (वर्गों) में योजना का लाभ देने के बाद देय राशि की गणना भिन्न-भिन्न तरीक़े से होती है।
  4. इस मामले में उपरोक्त दोनों अधिकारियों द्वारा निर्गत SVLDRS-4 संख्या L041219SV400081, दिनांक 04.12.2019 (संलग्नक–2 के रूप में संलग्न है) में इसी प्रकार आवेदनकर्ता की Category (वर्ग) को “Litigation Category” में ही जानबूझकर नियमविरुद्ध तरीके से स्वीकृत करके अपने निजी स्वार्थ के लिए आवेदनकर्ता को लाखों रूपये का अनुचित लाभ देकर सरकारी खजाने को नुक़सान पहुँचाया है।
  5. 6. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, नई दिल्ली, द्वारा ज़ारी परिपत्र संख्या 1072/05/2019-CX, दिनांक 09.2019 (संलग्नक–3 के रूप में संलग्न है) के द्वारा ये स्पष्ट किया गया है कि “Arrears Category” में योजना के अंतर्गत किए गए आवेदन में देय राशि की गणना ‘Net Outstanding Amount’ पर करनी है अर्थात कुल बकाया राशि में पहले से जमा किए गए सभी कर को घटाने के बाद शेष राशि पर गणना करनी हैI जबकि किसी अपीलीय फ़ोरम पर लम्बित मामले जो कि “Litigation Category” के अंतर्गत आएँगे, में देय राशि की गणना सम्पूर्ण विवादित कर राशि पर करके पहले से जमा की हुई राशि को “Pre-Deposit” का लाभ दे कर, अंतिम देय राशि से घटा कर करनी है। उपरोक्त मामले में हुए फर्जीवाड़े द्वारा भारत सरकार को हुई राजस्व हानि और आवेदनकर्ता फर्म को नामित समिति के सदस्यों महेंद्र रंगा, प्रधान आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय एवं विवेक कुमार जैन, अपर आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय द्वारा पहुँचाये गए अनुचित लाभ की गणना निम्नवत है :

 

Category Duty amount Pre-deposit Amount for calculation for SVLDRS Payable amount as per scheme Benefit of Pre-deposit Final payable amount
Litigation category 40728100 33645955 40728100 20364050 (50%) 33645955 0
Arrears category 40728100 33645955 7082145 4249287 (60%) 0 4249287
Revenue loss to the Government and undue benefit to applicant 4249287
  1. 7. उपरोक्त सारणी से यह स्पष्ट है कि इस मामले में आवेदनकर्ता को रूपये 42,49,287/- का अनुचित लाभ महेंद्र रंगा, प्रधान आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय एवं विवेक कुमार जैन, अपर आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय की समिति ने पहुँचाया है जिनके ऊपर देय राशि को निर्धारित करने की सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी क़ानून के अनुसार थी । उपरोक्त दोनों अधिकारियों की समिति द्वारा निपटाए गए SVLDRS, 2019 आवेदनों के सभी मामलों में इस तरह के कई और भी फर्जीवाड़े हो सकते हैं जिसमें निजी लाभ लेकर इसी प्रकार से आवेदनों की गलत और नियमविरुद्ध Category (वर्गों) को स्वीकृति देकर, या फिर किसी अन्य प्रणाली से फर्जीवाड़ा करके और SVLDRS, 2019 के नियमों को ताक पर रखकर भारत सरकार के राजस्व को हानि पहुँचायी गयी हो।

प्रार्थना

(क).   अतः ये निवेदन है कि इस मामले की किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच एजेंसी द्वारा सम्पूर्ण और निष्पक्ष जाँच करवाई जाये और भारत सरकार के राजस्व को हानि पहुँचाने के लिए उपरोक्त समिति के सदस्यों महेंद्र रंगा, प्रधान आयुक्त, एवं विवेक कुमार जैन, अपर आयुक्त, के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जायेI

(ख).   महेंद्र रंगा, प्रधान आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय एवं विवेक कुमार जैन, अपर आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर, लखनऊ आयुक्तालय की समिति द्वारा निपटाए गए SVLDRS, 2019 आवेदनों के सभी मामलों की किसी निष्पक्ष जाँच एजेंसी द्वारा सम्पूर्ण और निष्पक्ष जाँच करवाई जाये क्योंकि उपरोक्त अधिकारियों द्वारा निपटाए गए सभी मामलों में इस तरह के कई और भी फर्जीवाड़े हो सकते हैं जिसमें निजी लाभ लेकर इसी प्रकार से आवेदनों की Category (वर्गों) को बदलकर और स्वीकृति प्रदान करके, या फिर किसी अन्य प्रणाली से SVLDRS, 2019 के नियमों को ताक पर रखकर भारत सरकार के राजस्व को हानि पहुँचायी गयी हो।

(ग).   जाँच के पश्चात् भारत सरकार के राजस्व में हुई कुल हानि को उपरोक्त दोनों अधिकारियों के वेतन से वसूला जायेI

(घ).   किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच एजेंसी द्वारा उपरोक्त दोनों अधिकारियों और उनके नजदीकी संबंधियों की चल और अचल संपत्ति की पूर्ण जाँच करवायी जाये और आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर उपरोक्त दोनों अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जायेI

इस फर्जीवाड़े के सभी साक्ष्य, दस्तावेज और विशिष्ट विवरण संलग्नक 1, 2 व 3 के रूप में इस पत्र के साथ संलग्न किये जा रहे हैंI  कृपया उपरोक्त मामले में कृत कार्यवाही से अधोहस्ताक्षरी को अवगत करने का भी कष्ट करें

संलग्नक:

  1. प्रतिलिपि SVLDRS-1 APNATECH CONSULTANCY SERVICES P LTD.
  2. प्रतिलिपि SVLDRS-4 APNATECH CONSULTANCY SERVICES P LTD.
  3. प्रतिलिपि परिपत्र संख्या 1072/05/2019-CX दिनांक 09.2019.

भवदीय

 श्रवण गुप्ता

सचिव

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